
120W/cm की क्षमता वाले मर्क्युरी यूवी लैंपों का सही उपयोग
जब हम अपने मानक मर्क्युरी यूवी लैंपों का डिज़ाइन करते हैं, तो हम औद्योगिक मुद्रण एवं कोटिंग प्रक्रियाओं की वास्तविक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हैं। खासकर, 120W/cm की ऊर्जा घनत्व को। यह एक ऐसा मान है जो इंक एवं चिपकने वाले पदार्थों को ठीक से सुखाने में मदद करता है, बिना सामग्री को नुकसान पहुँचाए।
ऊर्जा घनत्व का महत्व
वास्तव में, ऊर्जा घनत्व ही उत्पादन गति को निर्धारित करता है। 120W/cm की ऊर्जा घनत्व के कारण UV-C एवं UV-B विकिरणों का संतुलन बना रहता है, जिससे इंक पूरी तरह से सुख जाता है। ऊपरी सतह पर सुखा हुआ इंक होना चाहिए, जबकि नीचे की सतह गीली ही रहनी चाहिए… वरना दाग एवं समस्याएँ हो जाती हैं। लेकिन ऊर्जा को अनियंत्रित रूप से बढ़ाना भी ठीक नहीं है… अगर ऊर्जा बहुत अधिक हो जाए, तो PET या प्लास्टिक फिल्में खराब हो जाती हैं।
इन लैंपों को काम करने हेतु आवश्यक तत्व
इन लैंपों को काम करने हेतु उच्च शुद्धता वाला क्वार्ट्ज ग्लास ही आवश्यक है… क्योंकि केवल यही सामग्री ही छोटी तरंगदैर्घ्य वाले UV विकिरणों को आसानी से पार होने देती है। अन्य किसी भी प्रकार का ग्लास तो ऊर्जा को अवशोषित कर लेता है, जिससे ग्लास गर्म हो जाता है एवं अंततः टूट जाता है।
गर्मी एवं वायरिंग संबंधी समस्याएँ
ये लैंप बहुत गर्म हो जाते हैं… अगर इन्हें ठीक से ठंडा न किया जाए, तो समस्याएँ हो जाती हैं। हम हमेशा फोर्स्ड एयर या वॉटर-कूल्ड जैकेटों का उपयोग करने की सलाह देते हैं… बिना इनके, क्वार्ट्ज ग्लास बहुत जल्दी खराब हो जाता है, एवं लैंपों को बार-बार बदलना पड़ता है।
इन लैंपों का उपयोग कहाँ होता है?
इन लैंपों का उपयोग मुख्य रूप से ऑफसेट प्रिंटिंग एवं UV-कोटिंग प्रक्रियाओं में होता है… ऐसे लैंप, पूरी प्रक्रिया का “इंजन” ही हैं… ये लगातार उच्च-तीव्रता वाली किरणें उत्सर्जित करते हैं, जिससे सब कुछ कुछ ही सेकंड में ठीक हो जाता है। इंजीनियरों के लिए ये एक विश्वसनीय एवं मानक उपकरण हैं… जिनकी मदद से उच्च मात्रा में उत्पादन किया जा सकता है, बिना किसी समस्या के।